रिशता

रिशता

हम से रिशता तोडने की वजह तो वतादी होती |
अनजाने मे हुई जो हमसे खता तो वतादी होती |

यूँ मुह मोड कर जाना अछी वात नही ,
नाजुक होठो से सजा तो सुना दी होती |

मै भी कहता कुश अपनी सफाई मे,
अगर तुने अपनी वंदशे हटादी होती |

गैरो की वातो मे आकर कीया तुने फैसला,
करते ईशारा तो जान कदमो मे विछादी होती |

झूठ का साध देना सीखा नही है ( कंवल ) ने,
वरना तेरी हां मे हां कब की मिलादी होती |

कंवलजीत सिह (राणा)
गाव ठौणा, जिला रोपड
दुवई +971555214011

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