कण – कण में

ss1

कण – कण में

जिसे  ढूंढते  रहे   गली-गली  दर-दर ,
वह हमेशा मिला सच्चाई  के द्वार में ।

बंद  पैकेट से  कब  क्या  निकलेगा ?
चेहरोंं से पता नहीं चलता संसार में ।

बड़ा  उछाल  है  बाजारी कीमतों में ,
खर्चा  बढ़   गया  है  तेरे  प्रचार  में ।

जरूरत नहीं पड़ती कुमार मांगने की,
सब  मिलता है ईश्वर  के  दरबार में ।

कण-कण  में बस्ता  है  पालन  हार,
भगवन,अल्ला,अंतर नहीं करतार में ।

कुमार अंगराल
युनीक ऐवीन्यु काहनुवान रोड
बटाला  143505
 
print
Share Button
Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *