एहसास 

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एहसास

तेरी खूबसूरत आँखें मेरी और हो गई, देखता था कहीं और ,
निगाहें तेरी और हो गई, चाहता था, आत्मा से शायद,
जन्मो से चली प्यास धिमी हो गई, होना चाहिए था,
पहले जो, उसके मुसकरने से मेरी  तड़फ तेज हो गई……..
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा,।
बिना पंखों के उड़ना सिखा दूंगा, उड़ना सिखा दूंगा,
फड़फड़ाना सिखा दूंगा,
बिना सहारे के खड़ना करना सिखा दूंगा खड़ना खड़ के गिरना कहां है
वो जगह बता दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।
चलना सिखा दूंगा तेरी चाल में बड़ा दूंगा,
अमीरी और गरीबी क्या सिखाती है, तुझे भी सिखा दूंगा,
जिंदगी क्या होती है, तुझे एहसास करा दूंगा,
इंसानियत के कदमों पर चलना सिखा दूंगा, तुझे ईलम पढ़ा दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।
ऊँची पढ़ाई कहां होती है, वो यूनिवर्सिटी दिखा दूंगा,
संतो से जो मैंने सीखा है, तुझे मंत्र सिखा दूंगा,
जान लेना सिखा दूंगा, जान देना सिखा दूंगा,
‘शाव’ में जान डालने का, मंत्र बता दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।
तेरी होश-हवास भुला दूंगा, तेरी अदला-बदली करा दूंगा,
तुझे आम से खास, खास से आम बना दूंगा,
तुझे किसी गिरे हुए आँसू की तरह, हाथ में उठा लूंगा,
साँस के साथ साथ, रूह मे समा लूंगा।
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा ।
अजनबी को अपना, दुश्मन को दोस्त, बनाना सिखा दूंगा,
अमीर-संस्कृति की पहचान करा दूंगा,
बरसों से चली आई, रीत  सिखा दूंगा,
ऊँचे से ऊँचे की पहचान करा दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।
महफ़ल छोड़ा तेरी, ऐकला बैठने लगा दूंगा,
इस सोच में तेरी, इजाफा करा दूंगा,
जो भूल न सकेगी, वो यादों में उलझा दूंगा,
खड़ इस किनारें, समुद्र पार दिखा दूंगा,
मुस्कुराती क्या है हमारी गली में आना,
हंसना सिखा दूंगा, रोना सिखा दूंगा।

संदीप कुमार नर (एम.ऐ थिएटर एंड टैलीविज़न  )

बलाचौर ( पंजाब -144521)

Reg no.11511988 L.p.u

जिला (शाहिद भगत सिंह नगर)

ई-मेल  sandeepnar22@yahoo.com

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