पुस्तक : हकीकत जिन्दगी की

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पुस्तक : हकीकत जिन्दगी की

लेखिका : संकलिता
प्रकाशक :कृति प्रकाशन , दिल्ली ।
पृष्ठ संख्या : 103,मुल्य : रू  200/-

यह  संग्रह  साहित्य सृजन में संकलिता का प्रथम प्रयास है। इस संग्रह में 4 लम्बी कविताएँ तथा 14 निबंध संकलित किए गए हैं । इस संग्रह का मुख्य पृष्ठ  खुद लेखिका द्वारा लिखा गया है। जिसमें उस ने इस संग्रह के मुतल्लक अपनी राय अलाहिदा से बड़ी पाकीजगी से दर्ज की है।
इस पुस्तक की रचनाओं का पाठ करते हुए पहली रचना से ही यह ज्ञात हो जाता है कि लेखिका खुद दर्द -ऐ-फिराक में  ग्रसत है जो तनहाई में जिगर की दवी दवी सी पीड़ा को जाहिर करते हुए कलम द्वारा निरसंकोच अंकित किया गया है।अलबत्ता दिल के करीब का मोहपाश तथा विरह में तनहाई कागज के चंद टुकड़ों को जोड़ कर खूबसूरत पुस्तक के रूप में ढल गई है।इसी दर्द -ए- दिल की चीस यह बयाँ करती है कि

   ” दिये जख्म इतने कि दर्द से निकली  हर आह ने/अपने आप से इस कदर  रू -ब -रू करवा दिया, कि जुबाँ से निकलने  वाला हर अलफाज़ मेरा,वक्त की हकीकत  की शायरी बन गया ।”
शायरी का यह बा कमाल लहिजा गूढ रहस्य को दिल में से निकाल कर सुहिरद पाठकों के सपुरद  हो रहा हो। इस संग्रह में रचनात्मकतौर पर कल्पना भी हकीकत को छू जाती है।आमूमन जब जीव के जीवन में  विरह उमडती है तो कुछ रूहानीयत बातों  को भी ग्रहन करता है। मसलन जिन्दगी अधियातमकबाद के रंग में  रंगने का  प्रयास करती है। यह यथार्थवादी रचनाएँ रचनाकार के मनोबल को ओर भी सकारात्मक बना देती हैं । रचनाएँ तथा निबंध वेदना के सहारे  अंतःकरण के दामन को छू लेता है और भावनात्मक संबंधों में  खो कर भी अलाहिदा दुनिया का आनंद लेता है।संग्रह  बताता है कि ईनसान महान है या उस पर बरबता और पाशविकता भारी है।  इस में रिश्तों पर विश्वास की अहमियत है। इस संग्रह में गीता सार- रस उमड़ कर पाठक के हृदय को कोमलता  प्रदान करता है। रचनाओं की विधवता में कर्म -रस इस संग्रह का केंद्र बिंदु सथापत होता  है।
यह संकलन मनुष्य के अवैध तरीकों  का संघर्ष, सुख-दुःख का एहसास ,संतोष -संताप व धर्म  की मर्यादा  के कायदे -कानून जो मनुष्य के जीवन में साथ साथ  चलते हैं आदि  का प्रचलन उस को अंधकार से रैशनी की ओर ले जाता  हुआ  प्रतीत होता  है।लेखिका ने अंगदान को जीने का परेणा श्रोत भी बनाया है जो आदुनिक युग में वैज्ञानिक सोच को प्राथमिकता  देता है। कि
“मरते- मरते जी पड़ेंगे, लाचार, बेबस,बदनसीब वो,लेकर दान तेरे अनमोल अंगों का,जीवन नया जी सकें गे ।”
इस संग्रह के प्रकाशित होने के कारण लेखिका संकलिता  की   वरिष्ठ लेखक के तौर पर पहचान निश्चित हुई है।लिहाजा यह संग्रह पाठक वर्ग के लिए  पढ़ने व समझने का अनमोल भंडार है।

कश्मीर घेसल

905/43 ऐ,चंडीगढ़।

मौ:9463656047

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