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सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करनेवाली दोनों महिलाओं ने बताया जान को खतरा

सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करनेवाली दोनों महिलाओं ने बताया जान को खतरा

नई दिल्ली, 17 जनवरी: केरल के सबरीमाला मंदिर में पिछले 2 जनवरी को प्रवेश करनेवाली महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका पर कल यानि 18 जनवरी को सुनवाई करेगा।याचिका कनक दुर्गा और बिंदु अम्मानि ने दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि उनके मंदिर में प्रवेश करने के बाद हिंसा का दौर शुरू हो गया था। इसकी वजह से दोनों महिलाएं छिपकर रह रही थीं। कनक दुर्गा की पिछले 14 जनवरी को उसकी सास ने पिटाई की थी। 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के साथ काफी समय से भेदभाव होता रहा है। महिला पुरुष से कमतर नहीं है। एक तरफ हम महिलाओं को देवी स्वरुप मानते हैं दूसरी तरफ हम उनसे भेदभाव करते हैं।

कोर्ट ने कहा था कि बायोलॉजिकल और फिजियोलॉजिकल वजहों से महिलाओं के धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया जा सकता है। तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा समेत चार जजों ने कहा था कि ये संविधान की धारा 25 के तहत मिले अधिकारों के विरुद्ध है। जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बाकी चार जजों के फैसले से अलग फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा था कि धार्मिक आस्था के मामले में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पूजा में कोर्ट का दखल ठीक नहीं है। मंदिर ही यह तय करे कि पूजा का तरीका क्या होगा। मंदिर के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि धार्मिक प्रथाओं को समानता के अधिकार के आधार पर पूरी तरह से परखा नहीं जा सकता है। यह पूजा करनेवालों पर निर्भर करता है न कि कोर्ट यह तय करे कि किसी के धर्म की प्रक्रिया क्या होगी। जस्टिस मल्होत्रा ने कहा था कि इस फैसले का असर दूसरे मंदिरों पर भी पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल किया गया है। इन पर 22 जनवरी को सुनवाई नियत की गई थी। लेकिन उस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच के सदस्य जस्टिस इंदू मल्होत्रा मेडिकल लीव पर हैं जिसकी वजह से रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई टल सकती है।

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