रयात बाहरा यूनिवर्सिटी में फ़सली अवशेष मैनेजमेंट पर वर्कशाप का आयोजन

रयात बाहरा यूनिवर्सिटी में फ़सली अवशेष मैनेजमेंट पर वर्कशाप का आयोजन

खरड़, ०२ दिसंबर (गुरनाम सागर): रयात बाहरा यूनिवर्सिटी स्कूल आफ कृषि विज्ञान की तरफ से कृषि विज्ञान केंद्र मोहाली के सहयोग के साथ फ़सली अवशेष मैनेजमेंट पर एक दिवसीय वर्कशाप का आयोजन किया गया।
इस मौके डा. यशवंत सिंह, डिप्टी डायरैक्टर, कृषि विज्ञान केंद्र, मोहाली, गुरू अंगद देव वेटनरी और एनिमल साईंसज़ यूनिवर्सिटी लुधियाना के साथ सम्बन्धित, ने किसानों को फ़सली अवशेष मैनेजमेंट बारे जागरूक करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने सरकार की तरफ से सब्सिडी रेटों पर किसानों को मुहैया की जा रही अलग अलग मशीनों बारे भी विस्तार में बताया।
डा. प्रियंका ने विद्यार्थियों को धान की पराळी को जलाने के कारण होने वाले सेहत सम्बन्धित ख़तरें से भी जानकार करवाया।
उन्होंने बताया कि धान की पराळी को जलाऩा बहुत ख़तरनाक हवा प्रदूषण पैदा करता है,जिस कारण ज़्यादातर लोगों को सेहत सम्बन्धित परेशानियाँ पैदा होती हैं और इसकी रोकथाम के लिए सख़्त कदम उठाने की ज़रूरत है।
उन्होंने बताया कि पंजाब में तकरीबन 20 मिलियन टन धान का उत्पादन हुआ, जिस में से 90 प्रतिशत धान की पराळी को जला दिया गया,जिस के साथ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में नुक्सान हुआ।
अपने सवागती भाषण में, यूनिवर्सिटी स्कूल आफ विज्ञान की डीन डा. हरविन्दर कौर ने कृषि विज्ञान केंद्र से पहुँचे मेहमानों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि धान की पराळी को जलाने के बुरे प्रभावों बारे किसानों और नौजवानों में जागरूकता पैदा करनी और फ़सली अवशेष का प्रबंध समय की ज़रूरत है।
इस मौके भाषण, कविज़्ज़ और पोस्टर बनाने आदि के मुकाबले भी आयोजित किये गए,जिस में करीब 300 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
अंत में डा. अमिता महाजन, वर्कशाप के कोआरडीनेटर ने पहुँचे मेहमानों का धन्यवाद किया।

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