तड़फ़ती रूह की आवाज़

ss1

तड़फ़ती रूह की आवाज़

मुझे जला देना तुरंत , मेरे   मरने  के बाद,
अब कब्र में भी लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं।
मत दफना देना  मुझे मेरे   मरने  के बाद,
अब कब्र में भी लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं।

ज़माना और था जब सबकी होती थी बेटियाँ,
सगे – संबंधी भी आज कल तो  रक्षक नहीं हैं।
पिता, भाई, बेटा, चाहे ससुर, देवर हो या जेठ,
बचा कौन सा रिश्ता जो हुआ कलंकित नहीं है।

बलात्कार की ख़बरों से मिलती अख़बारें भरी हैं,
नंनि सी जानें भी खौफ से रहती सहमी डरी हैं ।
कानूनी शिकंजे में बल नहीं या दोषी बलवान हैं,
कितनी ही  ज़िंदगियां  बर्बाद   जिन्होंने  करी हैं।

हरप्रीत न  जाने वो समय न जाने कब आयेगा,
हर नारी को जब पवित्र नज़र से देखा जायेगा।
हर बहन बेटी का दु:ख जब अपना हो जायेगा,
सचमुच ही वो समय फ़िर सतयुग कहलाएगा..।

Share Button

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *