आदत

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आदत

दुख में तन जलाने की आदत है,
दिल में गम छुपाने की आदत है ।

तू खंजर लेकर आया, ना छुपा,
हमें जख्म खाने की आदत है ।

जो भी है कह दे पीठ पीछे क्यों?
हमें भूल जाने की आदत है ।

कोई करे जा न करे कर्म,
हमें कृत्य करने की आदत है।

वहशी के साथ वहशी नहीं ,
हमें सदाचार की आदत है ।

जी भर के करले सितम यारा,
हमें मर्षण करने की आदत है ।

तोड़ सकते हो तोड़ लो कुमार,
हमें रिश्ता निभाने की आदत है ।

कुमार अंगराल
युनीक ऐवीन्यु काहनुवान रोड
बटाला 143505

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