अभिषेक कपूर की फ़ितूर ने पूरे किये 2 साल, आइये लोकप्रिय क्लासिक अनुकूलन पर डालते है एक नजर!

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अभिषेक कपूर की फ़ितूर ने पूरे किये 2 साल, आइये लोकप्रिय क्लासिक अनुकूलन पर डालते है एक नजर!

फिल्म समीक्षकों द्वारा मास्टरपीस मानी जाने वाली फ़िल्म फ़ितूर ने दो साल पूरे कर लिए है, ऐसे में आइये अन्य फिल्मों पर भी एक नज़र डालते हैं जिसने क्लासिक्स से प्रेरणा ली हैं।

अनुकूलन के बारे में एक बात यह है कि समय के साथ बड़े पर्दे पर निर्मित होने पर वे प्रतिष्ठित क्लासिक्स बनने के मुकाम को प्राप्त करती हैं।

पिछले कई वर्षों में, संजय लीला भंसाली, विशाल भारद्वाज और अब अभिषेक कपूर जैसे निर्देशकों ने बड़ी पर्दे पर इन क्लासिक उपन्यासों को जीवन में लाने की कोशिश की।

प्रदर्शक वितरक अक्षय राठी ने कहा,”यदि फिल्म निर्माता उन्हें क्रिस्प, मनोरंजक और आकर्षक सिनेमा में बदल दे, तो दर्शकों को यह खूब पसंद आती है। यही कारण है कि कई सालों से दुनिया भर के कई फिल्म निर्माताओं ने क्लासिक्स के अनुकूल पर अपना हाथ आजमाने की कोशिश की है।”

अभिषेक ने कहा,”फ़ितूर (2016) मेरे लिए बेहद समृद्ध प्रॉजेक्ट था। विशिष्ट प्रकार की सुंदरता और विस्तार से भरी फिल्म का निर्माण करना, एक फिल्म निर्माता के रूप में मेरे लिए यह एक दुर्लभ अवसर था। आप अपनी फिल्मों को अपने बच्चों के रूप में सोचते हैं और वे अलग-अलग तरीके से प्यार करने के योग्य होती हैं।”

पिछले कई वर्षों में, विशाल भारद्वाज ने कई विलियम शेक्सपियर की क्लासिक्स को सफलतापूर्वक रूपांतरित कर दिया है जैसे कि मैकबेथ, ओथेलो और हेमलेट को क्रमशः मकबूल (2003), ओमकारा (2006) और हैदर (2014) रूपांतरित किया गया है।

भंसाली ने कहा,”लेकिन क्या ऐसे प्रारूपों को फिल्म प्रारूप में फिट करना एक चुनौती नहीं है। मैंने वैसे भी हमेशा मुश्किल फिल्में बनाईं और कभी शॉर्टकट नहीं लिया। कागज पर एक फिल्म कभी असंभव नही लगती, लेकिन जिस आप विश्वास और पागलपन के साथ एक फिल्म बना रहे हैं यह महत्वपूर्ण है।”

भारद्वाज आसानी से स्वीकार करते हैं कि “नाटकीय लेखन और लक्षण वर्णन” ने उन्हें शेक्सपियर के प्रति आकर्षित किया हैं। हम स्क्रिप्ट में क्या देखते हैं? यह नाटक अद्वितीय होना चाहिए। यह सापेक्ष होना चाहिए। देखिए किस तरह शेक्सपियर ने मनुष्यों के मानसिकता के साथ खेलते है। इसीलिए उनका लेखन 450 वर्षों के बाद भी प्रासंगिक है, और कॉपीराइट भी एक मुद्दा नहीं है (हँसते हुए)।”, उन्होंने कहा।

आने वाले दिनों में, हम मेघना गुलजार को कॉलिंग सहमत की कहानी को आलिया भट्ट अभिनीत राज़ी के साथ पेश करते हुए देखेंगे।

चाहे वो देवदास हो या फितूर और अब आगामी राज़ी, इस तरह की कहानी कई वर्षों तक दर्शकों के दिमाग मे तरोताज़ा रहती है।

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